बुधवार, 16 मार्च 2016

।। बीजक ।।



















मेरी तासीर में
तुम्हारी ही हथेली है

मेरी आवाज में
तुम्हारी ही ध्वनि है

मेरी हथेली में
तुम्हारी ही गरमाहट है

मेरे स्पन्दन में
तुम्हारी ही आहटें हैं

मेरी लय में
तुम्हारा ही निनाद है

मेरी देह के बीजक में
तुम्हारा ही प्राण-बीज है

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