गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

दो कविताएँ


 















।। काला कोट ।।

कविताओं ने
पहन लिया है काला कोट
शब्दों का
समय के विरोध में

कविता का हर शब्द
हालात के मातम में मौन ।

कुछ लोग लील लिए हैं
समय के प्रतिरोधी सच्चे शब्दों को

बहुत कम शब्द बचे हैं
जो बोलते हैं अपने अर्थ
शब्दों की मौलिक प्रकृति के साथ ।

।। सच की किताब ।।

किताबों में
होते हैं शब्द
और शब्दों के पहाड़
प्रवाहित होता है
नदियों-सा अर्थ
जीवन के प्रश्नों की
तृप्ति के लिए ।

किताबों में है विश्व
और विश्व के बाहर का
चमकता ब्रह्माण्ड ।

किताबों में हैं
कहानियाँ
और कहानियों में हैं
आदमी के किताब
हो जाने का इतिहास ।

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