मंगलवार, 19 नवंबर 2013

।। सीशिल ।।


















सीशिल
धरती पर वृक्ष सरीखी अपनी जड़ें धँसाएँ हुए
कैरेबियाई हस्तशिल्पी स्त्री का नाम है

तराश से जन्म लेती है
वृक्ष के शुष्क तने से
न जाने कितनी काष्ठ सामग्री मनका और बाजूबन्द तक

तने की तरह तनी हुई
पर, रेशे-रेशे की मुलायम
काष्ठाग्नि प्रज्वलित है
उसकी जीवनोन्मुखी जिजीविषा की पर्तों में

जंगल बीच
वन की कला देवी सी अड़ी-खड़ी
बरखा को पीती
समुद्र के सौंदर्य की सरल हार्दिकता की
संपत्ति को जीती
वह जानती है
ग्रीन हार्ट और महोगनी जैसे
गठीले वृक्षों की जल विरोधी मजबूती की तरह
पत्थर या लौह स्तम्भ की तरह
जलधार बीच खड़ी
सीशिल जानती है
वृक्ष का वक्ष
वक्ष के स्वप्न

स्वप्न की आकांक्षा को
सूखी लकड़ी की देह में जीती हुई
सीशिल उकेरती है
संसार की कलाओं का सौभाग्य-सुख
ऋतुओं में
कालिदास का ऋतुसंहार
इंद्र का ऐंद्रिक जाल
फाल्गुन का उन्माद
जबकि
ग्रीन-हार्ट सम्पूर्ण वृक्ष
एक दिन में जीता है अपना पीताभी बसंत

मानव देह में प्रवेश की हुई
मृतात्मा की छाया को
अपनी आँखों से डसती हुई
साँसों से झाड़ फेंकती है पापात्मा की छाया
कि जैसे मानव-देह के वृक्ष तने में
लगा हुआ कीड़ा हो वह कोई
जिसे फलने से पूर्व ही नष्ट करती है कुत्सित आत्मा

वन के वृक्षों के हित में लगी
गाँवों में सँस्कृति के वृक्ष लगाती
कि 'काराबासी' नाम की आफरो सँस्कृति
बन सके जनप्रिय विश्व सँस्कृति
काष्ठ की देह में
कलाकृतियों के बहाने से

(ग्रीन हार्ट - ब्राजील और गयानी तटों के जंगल का जलजीवी वृक्ष है, जो गदराई देह वाली समृद्ध नदियों को पार करने के लिए पुल के लकड़ी के रूप में इस्तेमाल में लायी जाती है । इससे बने पुल पचासों वर्षों तक मजबूत बने रहते हैं । यह वृक्ष वर्ष में सिर्फ एक बार कुछ दिनों के लिए वासंती पुष्पों से लद जाता है । यह करीब सप्ताह भर तक विशाल ऊँचा पीत वृक्ष-सा प्रदर्शित होता है ।
काराबासी - कैरेबियाई देशों में प्रसिद्ध आफरो काष्ठ कला का नाम ।)

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