सोमवार, 17 मार्च 2014

।। कीस मौरिक ।।

















धरती से
जोड़े रखता है अपने पाँव
जैसे धरती से ही उगे हों वह
वे भी वनस्पति की
एक प्रजाति हों जैसे
                जंगलजीवी ।

आकाश की नीलिमा से
अपनी आँखों को करता है सुनील
सागर की सजलता से
लेता है अपने उर में निस्सीम सजलता
सबके लिए सजल उर मित्र ।

डच निवासी
विश्व प्रवासी
काम से थककर मिटाता है थकान
विश्व के जंगल में
जो सुसंस्कृत दुनिया से हैं अधिक कुलीन ।

जानवरों का शिकारी
लेकिन, पशु-पक्षी प्रेमी
जंगल और पशुओं को
बचाए रखने के लिए
शिकार करते हैं जानवर ।

दिमागदार बातें होने पर
अपनी कनपटी के माथे पर
तर्जनी धरकर घुमाते हैं गोल-गोल
जैसे कसते रहते हों हर पल
               अपने दिमाग को ।

धन के लिए
घुमाते हैं अपनी ऊँगलियाँ गोल-गोल
तर्जनी पर रगड़ते हैं अँगूठा
और मुँह से उच्चारते हैं मनी
'मनी और माइंड' का पर्याय हैं कीस मौरिक
मनी के लिए चाहिए माइंड
लेकिन माइंड के लिए कुछ और
जिसका रहस्य जानते हैं
कीस मौरिक
और सिर्फ कीस मौरिक ।

घुमंतू पहिये की तरह
नहीं थमते हैं पाँव
खाली समय मिलते ही
जंगल से भरते हैं अपनी आँखें
अपना समय ।

समुद्रवर्ती नदी तट पर
बसे घर और कार्यालय की
दीवारों पर लगा रखे हैं
मासूम आँखों से हेरते हिरण और बारहसिंहा
घर की मेजों पर बैठा रखे हैं पक्षी
जैसे लकड़ी की मेज
किसी वृक्ष की शाखा हो ।

दिनभर अपनी कंपनी के कार्यकर्ताओं के साथ
जुतते-जूझते
सही साँझ बैठते हैं अपने जानवरों के खोलों के बीच
सहलाते हैं उनका निर्जीव माथा
                   उनकी देह
                   उनके केश
जैसे बेजान होने पर भी
उनकी ही देह में बचा है
स्पर्श का आनंद ।

बच्चों के लिए फरिश्तों की हथेली
दोस्तों के लिए दोस्त के हाथ ।

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