गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

।। अनोखी भाषा ।।

























तुम्हारे-अपने संबंधों के लिए
रची है मैंने
एक अनूठी भाषा
जिसके शब्द
रातों की तन्हाई
और नींदों के सपनों से बने हैं

खुली आँखों में
सपनों का घर है
आँखों के पाँव
पहचानते हैं ह्रदय का रास्ता
काँच हुई देह पर
गिरते हैं ओंठों के बूँद-शब्द

पिघलता है रंगों का सौंदर्य
अकेलेपन की आग में
स्मृतियों की गीली रेत पर
चलती हैं अधीर आकांक्षाएँ

अभिलाषाएँ
वेनेजुएला के राष्ट्रीय पुष्प-वृक्ष
'ग्रीन हार्ट' का पर्याय नहीं है
जो सिर्फ एक दिन के लिए
हवाओं में खिलता है
अपनी साँसों
और पीताभ सौंदर्य-बोध के लिए ।

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