बुधवार, 27 अगस्त 2014

।। छाई है परछाईं ।।


















ईश्वर के प्रेम की
छाया है तुम्हारी आत्मा में

ईश्वर अंश है
तुम्हारा चित्त

तुम्हारे प्रेम में
मैं 'प्रेम' का ईश्वर देखती हूँ

तुम्हें
छू कर मैं प्रेम का ईश्वर छूती हूँ

तुम्हारे कारण
पत्थर के भीतर का
विश्वास-ईश्वर देख पाती हूँ

तुम्हारे कारण
पाषाण में बचा है ईश्वर

शब्दों में
तुमने रचा है ईश्वर
कि वह दिखाई देता है आँखों में
और गूँजता है प्राण-साँसों में

तुमने
धर्म में बचाया है ईश्वर
क्योंकि
तुमने हाँ … तुम्हारे अस्तित्व में
है ईश्वर …

इसीलिए तुममें है
ईश्वर का प्रेम
ईश्वरीय प्रेम
पवित्र पारदर्शी

वह अक्षय स्रोत ।

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