सोमवार, 5 मई 2014

।। रेड बैली ।।


















प्यार का लाल पक्षी
फूल-सा कोमल और मुलायम
सेमल-सा रेशमी
चित्त-चितेरा

प्रिय का ह्रदय ही नीड़
चक्कर लगाता है नित्य

खोलो खिड़कियाँ
अपने चित्त के सिरहाने की
पक्षी की रक्षा में

समुद्र-पार उड़ान से
भारी है पंख
निश्चय ही अलौकिक है उसका प्रेम

समर्पित करता है अपना सर्वस्व
प्रणय की प्रतीक्षा में

विरल प्रणय-पाखी का स्पर्श करते तुम
तुम्हारे ऊष्म और धड़कते वक्ष की
अनमोल कोशिश एक
महाकोशिश

प्राणों में जैसे महाप्राण
रेड वैली पाखी ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें