।। प्रिय में स्वप्न ।।


















स्वप्न में प्रिय
प्रिय में स्वप्न

पलकों के पालने में
झुलाती है  प्रेम
और प्रेम में
झूलती है   स्वयं

प्रेम में प्रिय
प्रिय में स्वप्न
स्मृतियों में शब्द
शब्दों में सुख
सुख में आनंद

आनंद में आत्मा को
झुलाती है
पलकों के पालने में
देह से विदेह होने के लिए

स्वप्न में प्रिय
प्रिय में स्वप्न

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