गुरुवार, 2 मई 2013

'भारत भवन' में हुए पुष्पिता अवस्थी के कविता पाठ की याद

पुष्पिता अवस्थी के करीब साढ़े तीन वर्ष पहले, 4 नबंवर 2009 को भोपाल स्थित 'भारत भवन' में आयोजित हुए कविता पाठ की स्मृतियों को साझा करते हुए भोपाल के एक पत्रकर और लेखक ने उक्त कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र हमें उपलब्ध कराया है । समकालीन कला एवं संस्कृति के केंद्र के रूप में विख्यात 'भारत भवन' में कविता पाठ के लिए हुई पुष्पिता अवस्थी की उपस्थिति का खास महत्व इस कारण से है क्योंकि 'भारत भवन' की पहचान उसके स्थापत्या के सौंदर्य के कारण नहीं, बल्कि उन लोगों के निर्णायक योगदान की वजह से है जो उसके संचालन के लिए जिम्मेदार रहे हैं । उनके उत्साह, उनके विवेक और उनकी असाधारण ऊर्जा के अभाव में, यह इमारत लोहा-लक्कड़ और चूना-पत्थर की एक बेजान इमारत भर होती ।
'भारत भवन' में आयोजित हुए पुष्पिता अवस्थी के कविता-पाठ तथा उनके कविता संग्रह 'अंतर्ध्वनि' के लोकार्पण कार्यक्रम को याद करते हुए 'भारत भवन' के उद्घाटन समारोह को याद करना प्रासंगिक भी होगा और दिलचस्प भी । 'भारत भवन' के उद्घाटन के मौके पर देश के तमाम प्रमुख कलाकारों, संगीतज्ञों, लेखकों को हवाई यात्रा-भत्ता देकर उनकी उपस्थिति को संभव किया गया था - ऐसा न इससे पहले कभी हुआ था और न इसके बाद कभी हुआ । देश में कला और कलाकारों व लेखकों को समुचित सम्मान दिए जाने का संभवतः यह पहला और अकेला उदहारण है । खास बात यह थी कि पूरे उद्घाटन दृश्य में एक भी राजनेता नहीं था - सिवाय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के, जिन्हें उद्घाटन करना था और सिवाय मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के जो रात्रि-भोज के मेज़बान थे । सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है कि जिस गैरसरकारी आयोजन में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उपस्थित हो रहे हों, उस आयोजन से दूसरे राजनेताओं को दूर रखना कितना मुश्किल रहा होगा ।
यह दरअसल उस 'ईमानदार' कोशिश की एक झलक भर है जो 'भारत भवन' को रूप और आकार देने के पीछे थी । शायद इसी कोशिश का नतीजा रहा कि वाशिंगटन की नेशनल गैलरी ने वाशिंगटन में विशेष प्रस्तुति हेतु, पूरे विश्व के छह संग्रहालयों का जो चयन किया था, उनमें 'भारत भवन' भी एक था । ऐसे 'भारत भवन' में पुष्पिता अवस्थी को कविता पाठ के लिए आमंत्रित किया जाना और तभी प्रकाशित हुए उनके कविता संग्रह 'अंतर्ध्वनि' को लोकार्पित करने का वहाँ आयोजन करना पुष्पिता अवस्थी के रचना संसार से जुड़े लोगों के लिए गर्व की बात है । 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें