सोमवार, 16 मार्च 2015

दो छोटी कविताएँ

























।। प्रेम का ईश्वर ।।

ओंठ
देह-भीतर
गढ़ते हैं एक देह

जिसे
हम-सब
प्रेम का ईश्वर
कहते हैं ।

।। एकल अनुभूति ।।

प्रणय
परकाया प्रवेश-साधन
देहान्तरण में रूपान्तरण की
अन्तरंग साधना

प्रणयानुभूति में
द्धिजत्व की एकल अनुभूति ।

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