'काँच का बक्सा' का दूसरा संस्करण


नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया द्धारा प्रकाशित पुष्पिता अवस्थी की पुस्तक 'काँच का बक्सा' का पहला संस्करण प्रकाशन-वर्ष के पहले ही वर्ष में बिक गया है और नेशनल बुक ट्रस्ट को एक वर्ष के भीतर ही इसका दूसरा संस्करण प्रकाशित करना पड़ा है । इस पुस्तक में पुष्पिता ने नीदरलैंड की लोककथाओं को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया है । 'काँच का बक्सा' का पंजाबी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ है, जिसे नेशनल बुक ट्रस्ट ने ही प्रकाशित किया है और उनके अनुसार जिसे पंजाबी पाठकों के बीच अच्छी लोकप्रियता मिली है । पुष्पिता के लिए नीदरलैंड में रह रहे कुछेक पंजाबी भाषी परिवारों के लोगों से यह सुनना/ जानना खासा सुखद और आश्चर्यपूर्ण रहा कि उनके बच्चों ने इसे पढ़ा और पसंद किया है । हिंदी में प्रकाशन के एक वर्ष के भीतर ही इसके दूसरे संस्करण के प्रकाशित होने की नेशनल बुक ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मिली सूचना ने भी पुष्पिता को खुशी तो दी ही है, चकित भी किया है । उनका कहना है कि इस पुस्तक की सामग्री को लेकर वह उत्साहित तो थीं, और उन्होंने इसमें की कहानियों को बड़े रिसर्च और मनोयोग के साथ लिखा था - लेकिन उन्हें भी उम्मीद नहीं थी कि इसमें की कहानियों को इस कदर पसंद किया जायेगा । 

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