।। खड़िया ।।


















चाँद ने
अपना कोई
घर नहीं बनाया
दीवारों से बाहर
रहने के लिए ।

सूरज
मकानों से
बाहर रहता है
दीवारों को
तपाने और पिघलाने के लिए
प्रकृति में सृष्टि के लिए ।

चाँद
वृक्षों की पात हथेली की मुट्ठी में
अपनी रोशनी को
बनाकर रखता है सितारा

चाँद
घरों के बाहर
अपनी रोशनी से
आवाज़ देता है कि
अँधेरे में
मेरी उजली चमक को देखो
लगता है
मैंने
श्यामपट्ट
खड़िया से लिखी है
ईश्वर की उजली सृष्टि
सूर्य के अस्त होने पर
अंधेरों के खिलाफ़ ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सूरीनाम में रहने वाले प्रवासियों की संघर्ष की गाथा है 'छिन्नमूल'

पुष्पिता अवस्थी को कोलकाता में ममता बनर्जी ने सम्मानित किया

।। सच ।।