मंगलवार, 24 सितंबर 2013

।। पृथ्वी अनुभव ।।


















नदी को
नदी की तरह सुनो
सुनाई देगी नदी
अपनी अंतरंग आवाज की तरह ।

चाँद को
चाँद की तरह देखो
दिखाई देगी चाँदनी
अपनी आँख की तरह ।

धरती को
धरती की तरह अनुभव करो
महसूस होगी पृथ्वी
अपनी तृप्ति की तरह ।

प्रकृति को
प्रकृति की तरह स्पर्श करो
तुममें उतर जायेगी प्रकृति
प्रेम सुख की तरह ।

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