रविवार, 24 जुलाई 2016

।। कैनवास ।।























बच्चे
अपने सपनों की दीवार पर
पाँव के तलवे बनाते हैं
लावा के रंग में
और उसी में उगाते हैं   सूरज

आकाश उसका
नीला नहीं पीला है
सूरज उसके लिए
पीला नहीं लाल है

पेड़ का रंग उसने
हरा ही चुना है
उसी में उसका मन भरा है

बच्चे ने
सपनों के रंग बदल दिए हैं
अपने काल के कैनवास के लिए ।

(नए प्रकाशित कविता संग्रह 'गर्भ की उतरन' से)

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