मंगलवार, 16 सितंबर 2014

।। तुममें समय ।।

























तुममें समय
और समय में तुम्हें देख पाती हूँ
 
तुममें कालिदास
और कालिदास में तुम्हें पढ़ आती हूँ
 
तुममें सागर
और सागर में तुम्हें जी लेती हूँ
 
तुममें ऋतु
और ऋतुओं में तुम्हें खोज लेती हूँ
 
तुममें प्रणय
और प्रणय में तुम्हें महसूस करती हूँ
 
तुममें शब्दार्थ
और शब्दार्थ में तुम्हें निहारती हूँ
 
तुममें अस्तित्व
और अस्तित्व में तुम्हें धारण करती हूँ
 
तुममें सुख
और सुख में सिर्फ तुम्हें बुलाती हूँ ।

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