शुक्रवार, 21 नवंबर 2014

।। कुँवारा आनंद-सुख ।।




















तुम्हारे शब्द
छूते हैं पूरा दिवस
आकार लेने लगता है समय
सार्थक होने के लिए

आत्मा
प्रणय के वसन्त में
लेती है पुनर्जन्म
प्रस्फुटित होता है सौंदर्य
भीतर से बाहर तक
सर्वांग में ।

स्नेह लहरों के
स्पर्श भर से
अनुभव होती है पूर्ण नदी
वर्षों तलक
कि आत्मा जी लेती है अक्षय
कुँवारा आनंद सुख ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें