कुछ भाव दृश्य


















।। राग की आग ।।

राग की आग
भिजोती है
और अपनी
आर्द्रता में दग्ध करती है ।

।। अर्क ।।

देखती हूँ
प्रणय के चाँद को
एकटक
कि चाँदनी का अर्क
उतर आए
प्रणय की तरह ।

।। प्रणयाकाश ।।

प्रेम
मन को परत-दर-परत
खोलता है
और रचता है आकाश ।

।। हथेली ।।

प्रणय
हथेली में
रखा हुआ
मधु-पुष्प है

साथ उड़ान की शक्ति
रचता है
शब्दों में
पृथ्वी का कोमलतम स्पर्श
सारी क्रूरताओं के विरूद्ध ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सूरीनाम में रहने वाले प्रवासियों की संघर्ष की गाथा है 'छिन्नमूल'

पुष्पिता अवस्थी को कोलकाता में ममता बनर्जी ने सम्मानित किया

।। पुकारती है पुकार ।।