मंगलवार, 11 जून 2013

कुछ भाव दृश्य


















।। राग की आग ।।

राग की आग
भिजोती है
और अपनी
आर्द्रता में दग्ध करती है ।

।। अर्क ।।

देखती हूँ
प्रणय के चाँद को
एकटक
कि चाँदनी का अर्क
उतर आए
प्रणय की तरह ।

।। प्रणयाकाश ।।

प्रेम
मन को परत-दर-परत
खोलता है
और रचता है आकाश ।

।। हथेली ।।

प्रणय
हथेली में
रखा हुआ
मधु-पुष्प है

साथ उड़ान की शक्ति
रचता है
शब्दों में
पृथ्वी का कोमलतम स्पर्श
सारी क्रूरताओं के विरूद्ध ।

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