बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

।। भीड़ के भीतर ।।


















पवन
छूती है नदी
और लहर हो जाती है ।

पवन
डुबकी लगाती है समुद्र में
और तूफ़ान हो जाती है ।

पवन
साँसों में समाकर
प्राण बन जाती है
और
देखने लगती है सबकुछ
आँखों में आँखें डालकर
और चलने लगती है
भीड़ के भीतर ।

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