मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

।। छुअन ।।

























प्रेम
घुलता है
द्रव्य की तरह
पिघलता है

राग-प्रार्थना में
लिप्त जाती है आत्मा ।

मुँदी पलकों के भीतर
प्रेम का ईश्वर
जुड़े हाथों के भीतर
हाथ जोड़े है
प्रेम ।

प्रेम में
बगैर संकेत के
देह से परे हो जाती है देह ।

रेखा की तरह
मिट जाती है देह
और अनुभव होती है
आत्मा की छुअन ।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें