गुरुवार, 3 अक्तूबर 2013

।। समय के विरुद्ध ।।

























रेत में
चिड़िया की तरह
उड़ने के लिए फड़फड़ाती ।

नदी में
मोर की तरह
नाचने के लिए छटपटाती ।

आकाश में
मछली की तरह
तैरने के लिए तड़पती ।

विरोधी समय में
मनःस्थितियाँ जागती हुई
जीती है अँधेरे में
उजाले के शब्द के लिए ।

शब्द से फैलेगा उजाला
अँधेरे समय के विरुद्ध ।

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