रविवार, 15 दिसंबर 2013

।। हथियार ।।


















कविता को
रचना है हथियार
सारे हथियारों के विरुद्ध
अपनी भाषा में ।

बिना युद्ध किए
जीतने हैं सभी युद्ध
आज की
सभी भाषाओँ को ।

धर्म के भीतर
बचाना है धर्म
बिना ईश्वर के । 

सारे धर्मों से बाहर निकालना है धर्म को
ईश्वर नहीं
आदमी के पक्ष में
कविता को
अपनी भाषा में
फिर वह कोई भी भाषा हो … ।

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