गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

।। डॉलफिन ।।

























डॉलफिन
सामुद्री ममता की प्रतीक
सागर की ह्रदय बनी हुई
धड़कती रहती है
लहरों के बीच
लहर बन कर ।

ऋषि समुद्र की संतान
सागर-मेधा-डॉलफिन
सागर की मेधस्वी नागरिक
न्यूजीलैंड, उत्तरी अमेरिका, कैरेबियाई सागर
दक्षिण अमेरिका और अर्जेंटाइनी तट पर
समुद्र की लहरों को
चुनौती देती हुई
लहरों की
बाधक दौड़ से
निर्बाध खेलती रात-दिन
कभी पानी के भीतर
कभी पानी के ऊपर ।

समुद्र की
स्मृतियों का घर है
डॉलफिन के भीतर
जलजीवों की सहचरा
मनुष्यों की भेंट पर
करती है मानवोचित आचरण
चूमती है हाथ और ओंठ
खेलती है बच्चों की तरह ।
समुद्र और पृथ्वी का भेद मिटाकर
लौटती है रेत-तट पर
और अपनी खिलखिलाहट में
उद्घोष करती है
सार्वभौमिक आनंद का रहस्य ।

समुद्र के भीतर है
सृष्टि की प्रकृति
प्रकृति की छटा
मनमोहक
जल ही जहाँ का पवन है
और जीवन भी ।

पञ्च तत्वों ने
रचा है समुद्र भीतर समुद्री पृथ्वी
जीवंत आलोक से भरपूर
जहाँ मछलियाँ तैरने से अधिक
उड़ती हैं तितलियों सी
जिनका रंग
सपनों की तरह
घुला है समुद्र में
जिसे पीती है डॉलफिन ।

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