बुधवार, 25 दिसंबर 2013

।। योरस ।।



















योरस
अपनी अविवाहित माँ मरियम के चेहरे के पीछे
छिपाए हैं अपने पिता अलेक्सेंडर का प्यार
और प्यार करना चाहते हैं दुनिया को
दुनिया की गोद में जाकर ।

योरस के चेहरे पर
उतरे हैं अपनी माँ के नयन-नक्श
जिसके भीतर से
बोलता है पिता का विश्वास ।

योरस
हँसते हैं रसीली हँसी
अपनी छह दँतुलियों के भीतर
दुनिया की खुशी के लिए
कि धुआँई जग से थकी ऊबी आँखें सीखे जीना
बच्चों की खुशी के लिए ।

दो वर्षीय योरस
देखना चाहते हैं
दोनों गोलार्द्धों को
अपनी नन्हीं ललाई मुट्ठी में कि
आणविक युद्ध की आग से
अधिक ताकत है
मुट्ठी की लालिमा में
अपना बनाने के लिए ।

नीली आँखों में समेटे हैं
अपनी मातृभूमि हालैंड की
दीर्घजीवी शांति
शांति-दूत कपोत
का संदेश संस्पर्श करता है मौन ।

चलने में असमर्थ
पर, बैठे ही बैठे घिसटकर
पहुँच जाना चाहते हैं
हर उस चाहत के पास
जो चाहती है उन्हीं की तरह ।

योरस से आती है
मानव-शिशु होने की
अलौकिक सुगंध
कि परफ्यूम्ड सुगंध के मिलते ही
चिहुँककर पलट लेते हैं
नाक मसलते
नहीं भूले हैं वे
अपनी माँ की सृजनधर्मी
गर्भ की वासंती सुगंध
जिसमें सृष्टि के सृजन की शक्ति है
सारे विरोधों के बावजूद ।

देशी-विदेशी
रिश्तों की छाती से लगकर
किलककर जी लेना चाहते है
पर अपने पिता और माँ की गोद के अलावा
सप्ताह में एक दिन मिलती है दादी और नानी
वे अपने आजा और नाना की हथेली में
मुँह छुपा जीना चाहते हैं अपनी दूधिया हँसी
पर
कभी-कभी ही
छाती से लगकर हुलास में जी पाते हैं
अपना अनजाना प्यारा बचपन ।

सब
उनके अपने
पसारे हैं अपनी हथेली
कि कब
योरस के पाँव बढ़े
दुनिया को नापने
और रास्ता निकालें
मानव-विरोधी नीतियों के विरुद्ध
आतंक के जहर को
रोक सकें अपने कंठ में
नीलकंठी शिव की तरह
वे संतान हैं
शिवत्व के शिव के
जिसके उपासक हैं
योरस के आजा ।

चम्मच भर लंबे हाथ की
नन्हीं ऊँगलियों से चम्मच थाम
चुगना चाहते हैं दो दाने
दुनिया के स्वाद के लिए
खुद-ब-खुद ।

ममा, पपा और ओपा(आजा)
के अलावा उनकी वाणी में है ऑतो (कार)
जब होते हैं
अपने ममा-पपा की कार की
स्टेयरिंग के सामने
तो लगता है समय उनके हाथ
और खुलती हैं मुट्ठियाँ
ऊँगलियाँ दबाती हैं हर बटन
खुल जा सिम सिम की जगह
चल री सिम सिम की तरह
चीखते हैं दमभर भरदम
ऑतो … ऑतो … ऑतो
अपनी ताकत भर
लगाते हैं धक्का
और स्टेयरिंग पर जोर
जैसे अपनी तिपहिया कठगाड़ी की सीट पर बैठ
कोमल तलवों से
धरती को दबाते हुए दौड़ाते हैं
कमरा-दर-कमरा
न जाने क्या खोजती हैं
उसकी नादान लेकिन गंभीर आँखें
चंचल लेकिन सधी ऊँगलियाँ
अशक्त लेकिन गति से संपूर्ण
कोमल पाँव
जिसमें धरती से अंतरिक्ष धाँगने की है
अद्भुत आकांक्षा ।

ऑतो चलाने के लिए
मचले योरस को अचानक याद आती है चाभी
पर बोलने-बताने में असमर्थ
ताकते हैं ममा-पपा की ओर
जबकि जानते हैं
माँ के वक्ष से तो मिल सकता है दूध
लेकिन पापा की छाती में ही है प्यार
और इच्छाओं के पूरा होने की गुंजाइश ।

योरस की दो आँखें हैं
समय-घड़ी की सुइयाँ
अलेक्स और मरियम के लिए
उसकी आँखों में देखते हैं वे अपना समय
नहीं टलने देना चाहते हैं
योरस के सोने का समय
याकि
सपनों का समय
वाइन या बियर की रंगत में
क्योंकि
अपने पापा और ममा की तरह
काम पर जाने की तरह
उन्हें जाना है क्रचेस शिशुशाला में
योरस के सपनों में है
वाइन का रंग विलक्षण
जिसका कार्क खुलेगा
उनकी अपनी चाहत से
समय आने पर ।

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