गुरुवार, 19 दिसंबर 2013

।। इफोन ।।



















इफोन
सबके लिए
एक स्त्री का नाम है
वह सिर्फ ख़ुशी का प्रतीक है ।

स्विट्जरलैंड, इटली, आस्ट्रिया की मिलन भूमि 'नाउदर्स' के
एक होटल की स्वागत रमणी है मालिक के लिए
आगंतुकों के लिए ।

उत्साहपूर्ण
सेवातुर ।

'प्लोनर' होटल मालिक
तीन कन्याओं के पिता ने
नहीं पहचाना इफोन के भीतर का बेटी मन ।

पल्लव-सी स्वयं
फूलों-सा सजाकर रखती है खुद को
पर
तितली की तरह
बैठ जाना चाहती है हर अतिथि के
पर्यटकी मन पर ।

अपनी आँखों की खुशी में
सोख लेना चाहती है वह अतिथियों की थकान ।

पक्षियों की तरह
यायावरों के कंधों पर
बैठकर घूम आना चाहती है देश-विदेश ।

संचार-युग में
तस्वीर खिंचवाने में
सहमती-सकुचती
इफोन स्वयं अपनी माँ की
एक सुंदरतम तस्वीर है
होटल के फ्रेम में जड़ी हुई ।

भविष्य की प्रतीक्षा में जीती
लेकिन, भविष्य से डरती
अपनी हथेलियों को
बंद रखती है अक्सर
जब से उसने जाना है कि
मुट्ठी में रहता है भविष्य ।

आस्ट्रिया के लिबास
नाउदर्स गाँव की संस्कृति के प्रति
उसके भीतर है खूबसूरत विद्रोह ।

इफोन रचना चाहती है
अपने इलाके के लिए नए सपने
होटल के पर्यटकों के लिए
स्वागत के आत्मीय लहजे
अकेले ही सबके साथ खड़े होना चाहती है
एक जगह रहकर भी यायावर होना चाहती है ।

अपनी माँ के साथ
वह देखती है सूरज का निकलना
चर्च के घंटों और कमरे की घड़ी से
जान पाती है वह सूरज का छुप जाना
और अपने एक दिन का
अँधेरे में डूब जाना ।

पहुँचती है घर
या कि माँ की गोद में
फिर दूसरे दिन के लिए सूरज की रोशनी ।

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