शुक्रवार, 30 अगस्त 2013

।। एक दूसरे में ।।

















चिड़िया की देह का
हिस्सा होकर भी
कुछ पंख
चिड़िया की उड़ान में
शामिल नहीं हैं ।

पर्वत होने पर भी
शिखर बनने से
रह जाते हैं
पहाड़ के कुछ हिस्से ।

हवाएँ
लिखती हैं उन पर
चढ़ाई की वेदना ।

नदियाँ
अपनी तरल धार के प्रवाह में
हथिया कर बहा लाती हैं उन्हें ।

नदी में
घुल जाते हैं शिखर
शिखर के रंग को रँग कर
नदी कभी हो जाती है शिखर
शिखर हो जाता है नदी
रेतीला, रुपहला और कभी
गेरुई और मटियाला ।

दोनों की देह विसर्जित
एक दूसरे में
एक दूसरे के लिए ।

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