।। अघोषित घोषणा-पत्र ।।




















गहरा अकेलापन जीने के बाद
पोछ आई हूँ काजल
तुम्हारी तौलिया में
वियोग सन्ताप के
करुण चिन्ह
भीगे आँसुओं की आर्द्रता
प्यार की नमी

करवटों की सघन चुप्पी-बाद
रोप आई हूँ कुछ सिलवटें
तुम्हारी चादर में
बेचैनी के रेखाचित्र
स्पर्श की आकुल-व्याकुल भाषा-लिपि
प्यार की ऊष्मा

मौन एकटक निहार बाद
लीप आई हूँ अपनी अदृश्य कसमसाती कसक
तुम्हारे आदमकद आईने में
आत्मीयता की ऊष्मा में पगी नरम अमिट साँसें
देह-चन्दन-रज
प्यार के क्रिस्टल

तुम्हारे कमरे की
हवाओं में
घोल आई हूँ एकाकीपन से तपी
अपनी उतप्त साँसें
जो लिखती ही रहती हैं
पल-प्रतिपल
प्राण-पट्ट पर
प्रणय का अघोषित घोषणा-पत्र ।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

सूरीनाम में रहने वाले प्रवासियों की संघर्ष की गाथा है 'छिन्नमूल'

पुष्पिता अवस्थी को कोलकाता में ममता बनर्जी ने सम्मानित किया

।। अंतरंग साँस ।।