मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

।। अघोषित घोषणा-पत्र ।।




















गहरा अकेलापन जीने के बाद
पोछ आई हूँ काजल
तुम्हारी तौलिया में
वियोग सन्ताप के
करुण चिन्ह
भीगे आँसुओं की आर्द्रता
प्यार की नमी

करवटों की सघन चुप्पी-बाद
रोप आई हूँ कुछ सिलवटें
तुम्हारी चादर में
बेचैनी के रेखाचित्र
स्पर्श की आकुल-व्याकुल भाषा-लिपि
प्यार की ऊष्मा

मौन एकटक निहार बाद
लीप आई हूँ अपनी अदृश्य कसमसाती कसक
तुम्हारे आदमकद आईने में
आत्मीयता की ऊष्मा में पगी नरम अमिट साँसें
देह-चन्दन-रज
प्यार के क्रिस्टल

तुम्हारे कमरे की
हवाओं में
घोल आई हूँ एकाकीपन से तपी
अपनी उतप्त साँसें
जो लिखती ही रहती हैं
पल-प्रतिपल
प्राण-पट्ट पर
प्रणय का अघोषित घोषणा-पत्र ।

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