।। प्रणय-वक्ष ।।





















आँखें
साधती हैं एकनिष्ठ
प्रणय-गर्भ में संवेदनाएँ

प्रणय-ऋषि-कानन
रचती हैं अनुभूतियाँ
दुष्यंत और शकुन्तला सरीखे
प्रणय-नव-उत्सर्ग
गंदर्भ-विवाह का आत्मिक संसर्ग

प्रेम के लिए
अपना प्राण सौंपता
तुम्हारा प्रणय-वक्ष
स्वर्ग का एक कोना
जहाँ प्यार के लिए
सर्वस्व - समर्पण ।

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