।। चाँद का आत्म-सुख ।।
सुनीलाकाश वक्ष पर लटकती हुई घड़ी है चाँद मिनट-दर-मिनट अंतरिक्ष से समेटता-बटोरता समय उलीचता है धरती पर और बदलता है तारीखें दिन-दिवस-माह लिखा जाता है जिसमें जन्म और मृत्यु का हिसाब सत्ता और शासन का इतिहास गुलामी का दर्द दवा बन जाने के लिए चाँद करता है खामोश बगावत चाँदनी बनकर पहुँचता है जंगल-दर-जंगल दासता से निचुड़े हुए लोग बुश नीग्रो अमर इंडियन ब्रिटिश इंडियन खून को पसीना की तरह बहाए हुए लोग छिपे हैं दक्षिण अमेरिका के सूरीनाम, गयाना और ब्राजीली जंगलों में जंगल-जीवी नागरीय संस्कृति के अनागरिक सुसंस्कृत सभ्यता से डरती हैं प्रकृतिजीवी वनीली जातियाँ चाँद जंगली जातियों का उत्सवी राजा है पूर्णिमा की रात चाँद के राजस्व में जंगली जातियाँ जीती हैं आनन्दोत्सव बेधड़क जिनका इतिहास लिखता है चाँद पृथ्वी की तथाकथित आधुनिक मानवीय सभ्यताओं के नाम चाँद पारिजाती कल्पवृक्ष रूपाभी रश्मियाँ चन्द्र कुसुम नवप्रियाओं के केशों में पुष्प-गजरा धरती के सौंदर्य के माथे की ...